मोहाली 04-02-2026 :-” रंग भी देखे रंगदार भी देखे, “माना” तेरे इतने किरदार न देखे ” बता दे कि ये सलोगन समग्र शिक्षा अभियान के 1007 दफ्तरी कर्मचारियों की तरफ से दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि समग्र शिक्षा अभियान के 1007 दफ्तरी कर्मचारी 15-20 सालों से शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं, समय समय की सरकारों चाहे वो अकाली भाजपा हो, कांग्रेस हो या फिर सत्ता में परिवर्तन का नारा ले के आई आम आदमी पार्टी की सरकार हो, सभी ने इन कर्मचारियों से धोखा ही किया है। अकाली और कांग्रेस की सरकारों से परेशान हो कर मुलाजिमों और यूथ ने आम आदमी पार्टी को मौका दिया, परंतु धोखा ही खाया। समग्र शिक्षा अभियान के यूनियन लीडर जगमोहन सिंह, रमन कुमार, संदीप कुमार मैडम निशा और मीनाक्षी ने बताया कि धरने प्रदर्शनों में से निकली आम आदमी पार्टी आज सत्ता से परेशान हो के अपने अधिकारों की मांग कर रहे धरने पर बैठे कर्मचारियों से अंधा अत्याचार कर रही है।
क्या है मसला आइए जानते हैं :-
*समग्र शिक्षा अभियान के 1007 दफ्तरी कर्मचारी 15-20 सालों से शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं,
इसी विभाग में 2018 में इनके साथ के 8886 अध्यापकों को रेगुलर कर दिया था, परंतु इन्हें छोड़ दिया गया। समय समय पे धरने प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार मीटिंग करती और समय निकल देती किसी भी सरकार ने एक रेगुलर करने की बात नहीं की।*
समग्र कर्मचारियों को अदालत का रुख करना पड़ा जिसमें 2018 से अध्यापकों की तर्ज पर रेगुलाफ करने की मांग की गई। जिस पर अदालत की तरफ से अध्यापकों की तरह रेगुलर करने का फैसला सुनाया गया। यह कर्मचारी पहले से ही पंजाब सरकार का पांचवां पे स्केल की सैलरी पर काम कर रहे थे, और सरकार की तरफ से इनको सातवें पे स्केल पे आज रेगुलर किया गया है, जिस की वजह से इनकी सैलरी 50000 से घटा के 19000 कर दी गई है।
कर्मचारियों का दोष है कि इस संबंध में पंजाब वित्त मंत्री हरपाल चीमा जी से बहुत बार मीटिंग हुई है, उन्होंने हर बार आश्वासन दिया कि किसी भी कर्मचारी की सैलरी कम नहीं होगी। परंतु सरकार की कहनी और करनी में बहुत अंतर है।*
कर्मचारियों का कहना है कि आज के समय में 20 साल तनदेही से नौकरी करने के बाद 19000 पे घर चलना नामुमकिन है, घर की किश्तों, बुज़ुर्ग मां बाप, बच्चों की फीस ये सब कैसे किया जाएगा, सरकार को इन सब के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा। तुरंत ही सरकार ने इस में ठोस कदम नहीं उठाया और कर्मचारियों को पूरी सैलरी पे रेगुलर नहीं किया तो कर्मचारी अपने परिवारों के साथ सड़कों पे और बाजारों में सरकार का असली चेहरा बेनकाब करेंगे । कर्मचारी संघर्ष करेंगे और सड़कों पे उतरने को मजबूर होंगे lCourtesy by – समग्र शिक्षा अभियान
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