2047 का India: 'हरा, केसरिया और सिमटती सफ़ेद पट्टी' भारत के भविष्य की
  • About Us
  • Advertisements
  • Terms
  • Contact Us
Thursday, February 5, 2026
Nav Times News
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो
  • चमकते सितारे
  • Blogs
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो
  • चमकते सितारे
  • Blogs
No Result
View All Result
Nav Times News
No Result
View All Result
Home राष्ट्रिय

2047 का India: ‘हरा, केसरिया और सिमटती सफ़ेद पट्टी’ भारत के भविष्य की चेतावनी – डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
February 2, 2026
in राष्ट्रिय
0
India

India जब 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव का उत्सव नहीं मना रहा होगा, बल्कि अपने सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक विकास का गहन आत्ममंथन भी कर रहा होगा। 2047 कोई दूर की तारीख़ नहीं, बल्कि वह दर्पण है जिसमें आज की प्रवृत्तियाँ जैसे हमारी भाषा, हमारे राजनीतिक निर्णय और हमारे सामाजिक व्यवहार, स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित होंगी। यह लेख किसी आशंका को बढ़ाने या किसी की भावनाओं को आहत करने का प्रयास नहीं है; बल्कि यह एक विवेकपूर्ण चेतावनी है कि यदि वर्तमान रुझानों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो भारत की सबसे बड़ी शक्ति यानी उसकी ‘सामाजिक शांति और विविधता’ दबाव में आ सकती है।

हाल के वर्षों में सार्वजनिक विमर्श अधिक भावनात्मक और पहचान-प्रधान हो गया है। राजनीति, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में विचारों की जगह प्रतीकों और नारों ने ले ली है। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि पहचान मनुष्य को सुरक्षा और अपनापन देती है। किंतु समस्या तब उत्पन्न होती है जब पहचान संवाद का माध्यम बनने के बजाय टकराव का कारण बन जाए। भारत जैसे विविध समाज में यह संतुलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

हिंदू समाज के भीतर सांस्कृतिक आत्मविश्वास का उभार पिछले कुछ दशकों से देखा जा रहा है। अनेक लोगों के लिए यह अपनी परंपराओं, इतिहास और सभ्यता पर गर्व की अभिव्यक्ति है। यह भावना स्वाभाविक और वैध है। साथ ही, मुस्लिम समुदाय सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के भीतर भी अपनी पहचान, सुरक्षा और प्रतिनिधित्व को लेकर सजगता बढ़ी है। यह भी उतना ही मानवीय और समझने योग्य है। समस्या इन भावनाओं में नहीं, बल्कि उस राजनीतिक और सामाजिक ढांचे में है जो इन्हें परस्पर संवाद के बजाय प्रतिस्पर्धा में बदल देता है। (India)

जब ‘हम’ और ‘वे’ की भाषा सार्वजनिक जीवन में हावी हो जाती है, तब लोकतंत्र की मूल भावना यानी सह-अस्तित्व’ धीरे-धीरे संकुचित होने लगती है। असहमति, जो लोकतंत्र का प्राण है, यदि सम्मान और संवेदनशीलता से रहित हो जाए, तो वह समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करती है। शांति का क्षरण अक्सर अचानक नहीं होता; वह भाषा के कठोर होने, नीतियों के असंतुलित दिखने और व्यवहार में बढ़ती असहिष्णुता से धीरे-धीरे आकार लेता है।

राष्ट्रीय प्रतीकों का अर्थ भी इसी सामाजिक चेतना से जुड़ा होता है। तिरंगा केवल रंगों का संयोजन नहीं है; वह शक्ति, समृद्धि और शांति के संतुलन का प्रतीक है। केसरिया साहस और त्याग का, हरा विकास और जीवन का, और सफ़ेद शांति व सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। यदि सामाजिक विमर्श में संघर्ष और पहचान के रंग अत्यधिक गाढ़े हो जाएँ और संवाद व संयम की जगह कम होती जाए, तो यह संतुलन प्रतीकात्मक रूप से भी कमजोर पड़ सकता है। यह कोई संवैधानिक परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रीय चेतना में आने वाला सूक्ष्म बदलाव होगा, जो समय के साथ गहरा असर डाल सकता है।

डिजिटल युग ने इस प्रक्रिया को और तेज़ किया है। तेज़ प्रतिक्रियाएँ, भावनात्मक संदेश और एल्गोरिदम-आधारित सामग्री अक्सर संयम की बजाय उत्तेजना को बढ़ावा देती हैं। राजनीति के लिए यह तात्कालिक लाभ का माध्यम बन सकता है, लेकिन समाज के लिए दीर्घकालिक चुनौती भी साबित हो सकता है। परिणामस्वरूप, शांति सक्रिय सह-अस्तित्व के बजाय एक नाजुक, तनावपूर्ण संतुलन में बदल सकती है, जो कभी भी टूट सकता है।फिर भी, मैं इस लेख के माध्यम से किसी अनिवार्य भविष्य की घोषणा नहीं करता। भारत के पास एक सशक्त संविधान है, स्वतंत्र संस्थाएँ हैं और विविधताओं को समेटने की ऐतिहासिक क्षमता भी है। भारत का लोकतंत्र कई कठिन दौरों से गुज़रा है और हर बार उसने स्वयं को पुनर्संतुलित किया है। आज भी वही संभावना मौजूद है, यदि विवेक को प्राथमिकता दी जाए तो। (India)

इस दिशा में कुछ मूलभूत स्तंभ निर्णायक होंगे। गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा, निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय, आर्थिक अवसरों की समान पहुँच और संघीय सहयोग, ये ऐसे तत्व हैं जो पहचान-आधारित तनाव को स्वाभाविक रूप से कम करते हैं। इतिहास और संस्कृति की शिक्षा का उद्देश्य किसी एक समुदाय का गौरव बढ़ाना नहीं, बल्कि साझा विरासत को समझाना होना चाहिए। मीडिया की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, मतलब उत्तेजना नहीं, संदर्भ देना; विभाजन नहीं, समझ पैदा करना।(India)

2047 का भारत कैसा होगा, यह पहले से तय नहीं है। यह भविष्य आज लिखे जा रहे निर्णयों, चुनी जा रही भाषाओं और अपनाए जा रहे व्यवहारों से बनेगा। नागरिक के रूप में यह हम पर निर्भर करता है कि हम भय और आवेश के आधार पर चुनाव करते हैं या विवेक और दूरदृष्टि का रास्ता चुनते हैं। लोकतंत्र की परिपक्वता इसी में है कि वह मतभेदों को सह सके, न कि उन्हें मिटाने की कोशिश करे।
यदि आने वाले वर्षों में शांति, संवाद और मर्यादा यानी तिरंगे की ‘सफ़ेद पट्टी’ को मज़बूत किया गया, तो विविधता भारत की शक्ति बनी रहेगी। लेकिन यदि उसे उपेक्षित किया गया, तो सामाजिक संतुलन कमजोर पड़ सकता है। अंत में मैं इतना ही कह सकता हूँ कि भारत अपनी सबसे बड़ी विरासत यानी सह-अस्तित्व को समझे, सहेजे और आगे बढ़ाए। 2047 का उत्सव तभी सार्थक होगा, जब India न केवल आर्थिक रूप से सशक्त, बल्कि सामाजिक रूप से संतुलित और नैतिक रूप से परिपक्व राष्ट्र के रूप में खड़ा हो।

Advertisement – Accounting Partner –Accutech , Publicity Partner- BDRINGESTA , Branding Partner – Ayuvista,Best Acting Classes Near me-  MS Asian Film Academy , Supported by Nav Times News , Powered by MSasian Entertainment , Pickle Partner- Foodco , Hospitality Partner – Health Mark Food 

Tags: Dr. Atul MalikramIndiapolitical strategistWarning of India's Future
Advertisement Banner Advertisement Banner Advertisement Banner
नवटाइम्स न्यूज़

नवटाइम्स न्यूज़

Recommended

Suniel Shetty

पान मसाला एड में Suniel Shetty? ‘गुटखा किंग’ कहने पर भड़के एक्टर, यूजर से कहा- भाई तू अपना…

4 years ago
Deepika Chikhaliya

37 साल बाद दीपिका चिखलिया ने लिया माता सीता का रूप, लव-कुश कांड का मंजर देख भावुक हुए फैंस|

3 years ago
Facebook Twitter Instagram Pinterest Youtube Tumblr LinkedIn

Nav Times News

"भारत की पहचान"
Phone : +91 7837667000
Email: navtimesnewslive@gmail.com
Location : India

Follow us

Recent News

Skoda

Skoda काइलैक ने एक वर्ष पूरा होने पर 50,000 बिक्री का आंकड़ा किया पार

February 4, 2026
FY26

FY26 की तीसरी तिमाही में मोबिक्विक ने कमाया मुनाफा; सालाना आधार पर 593 मिलियन रुपए की मजबूत बढ़त

February 4, 2026

Click on poster to watch

Bhaiya ji Smile Movie
Bhaiya ji Smile Movie

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)

No Result
View All Result
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो
  • चमकते सितारे
  • Blogs

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)