कोलकाता, मार्च, 2026: कोलकाता के आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी Hospital, में एक दुर्लभ और सफल शल्य-चिकित्सा के माध्यम से 23 वर्षीय एक मरीज का उपचार किया गया। इस मरीज को हॉर्सशू किडनी (जन्मजात बीमारी) में जटिल पीयूजे अवरोध की समस्या थी। यह प्रक्रिया उन्नत, न्यूनतम चीरा-आधारित लैप्रोस्कोपी तकनीक की सहायता से की गई। इस प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. ज़ीशान रहमान ने किया। चिकित्सकों ने सावधानीपूर्वक एक महत्वपूर्ण रक्त वाहिका को सुरक्षित रखा, किडनी की गंभीर सूजन (हाइड्रोनेफ्रोसिस) को कम किया और मरीज मात्र 3 दिनों में बिना दर्द के घर लौट सका।
मरीज़ को बाईं तरफ की किडनी के हिस्से में लगातार दर्द की शिकायत रहती थी। हॉस्पिटल आने पर एक नॉन-कंट्रास्ट सीटी (एनसीसीटी केयूबी) स्कैन से पता चला कि हॉर्सशू किडनी के बाएँ हिस्से में ग्रॉस हाइड्रोनफ्रोसिस है। यह एक जन्मजात बीमारी होती है। इसमें किडनी प्रभावित होती है और शरीर की बनावट बदल जाती है। आगे और जाँच हुई, तो पता चला कि एक क्रॉसिंग ब्लड वेसल (रक्त वाहिका) रुकावट का कारण बन रही है, जिससे मामला मुख्य तौर पर पेंचीदा हो गया था।
आरजी कोलकाता के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ ज़ीशान रहमान ने कहा, “हॉर्सशू किडनी में पीयूजे अवरोध का इलाज़ उसकी बदली हुई शारीरिक संरचना तथा संबंधित रक्त वाहिकाओं की विविधताओं के कारण स्वाभाविक रूप से जटिल होता है। इस मामले में रुकावट को खत्म करने के साथ-साथ उस पारगामी रक्त वाहिका (क्रॉसिंग वेसल) को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक था। उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से हम इन दोनों चीजों को करने में सफल रहे। इससे मरीज़ को काफी राहत मिली और उसकी रिकवरी भी जल्दी हुई।“ (Hospital)
उन्होंने आगे बताया, “शारीरिक संरचना की जटिलता को देखते हुए, सर्जिकल टीम ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत डीजे स्टेंटिंग के साथ लैप्रोस्कोपिक पाइलोप्लास्टी की। रक्त वाहिकाओं के आपस में टकराने के कारण महत्वपूर्ण संवहनी संरचनाओं को संरक्षित करते हुए, अवरोध को दूर करने के लिए सावधानीपूर्वक सर्जिकल योजना और निष्पादन की आवश्यकता थी।”सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। पारगामी रक्त वाहिका (क्रॉसिंग वेसल) को सुरक्षित रखते हुए, अवरोध से प्रभावी राहत प्रदान की गई, जो किडनी के कार्य को बनाए रखने तथा जटिलताओं से बचाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। (Hospital)
मरीज़ की रिकवरी आसान रही और शल्य-चिकित्सा के तीसरे दिन ही उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। इस मामले से जटिल यूरोलॉजिकल मामलों में न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के लाभ स्पष्ट रूप से सामने आए।यह उपलब्धि यूरोलॉजी की सबसे कठिन चुनौतियों से निपटने में आरजी स्टोन कोलकाता की विशेषज्ञता को दर्शाती है और पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रिकवरी के समय व जटिलताओं को कम करती है।
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