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Jaya Ekadashi: इस फरवरी पड़ने वाले जया एकादशी पर अपनाये ये उपाय पिशाच योनि से मिलेगी मुक्ति, पुराने पापों का होगा नाश|

एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. भगवान विष्णु की इस दिन विधिवाद पूजा-अर्चना करी जाती है.

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
January 31, 2023
in धार्मिक
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Jaya Ekadashi

Jaya Ekadashi: एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. भगवान विष्णु की इस दिन विधिवाद पूजा-अर्चना करी जाती है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी भी कहा जाता हैं. इस बार जया एकादशी व्रत बुधवार के दिन यानी 1 फरवरी को पड़ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान की पूजा-पाठ कर व्रत रखने से मृत्यु के बाद व्यक्ति को पिशाच योनि से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही व्यक्ति के किये गए पुराने पाप कर्म भी नष्ट हो जाते हैं. हिन्दू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जया एकादशी के दिन व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के पाप घटते है. जिसके चलते जया एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण माना गया है. आपको बता दें कि हर महीने दोनों पक्षों की एकादशी का अपना-अपना महत्व है. इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने मात्र ही पिशाच योनि से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है.

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चलिए जानते है जया एकादशी की पूजा विधि व क्या है महत्व.

जया एकादशी का शुभ मुहूर्त: ((Jaya Ekadashi Shubh Muhurat)

पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 31 जनवरी, मंगलवार सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी और समापन 01 फरवरी, बुधवार 2023 दोपहर 02 बजकर 01 मिनट पर होगा. ऐसे में ज्योतिशो के अनुसार जया एकादशी का व्रत और पूजन 01 फरवरी के दिन ही मान्य होगा. जया एकादशी के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 01 फरवरी सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक ही रहेगा.

जया एकादशी की पूजा विधि: (Jaya Ekadashi Pooja Vidhi)

जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए. उसके बाद अपने पूजा कक्ष या जहाँ भी आप पूजा करते है वहाँ दीपक जलाकर भगवान विष्णु के समक्ष हाथ जोड़ते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजा के लिए एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा  बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें. भगवान विष्णु की प्रतिमा पर गंगाजल से छिड़काव कर चंदन का तिलक लगाएं. उसके बाद पीले फूल, फल, मिष्ठान, धूप-दीप, कुमकुम, तांदुल, इत्र, नैवेद्य आदि अर्पित करें और जया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें. और आखिर में भगवान की आरती अवश्य करें. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापो का नष्ट होता है और भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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जया एकादशी व्रत का महत्व: (Jaya Ekadashi Vrat Mahatva)

शास्त्रों के अनुसार जया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को बहुत ही फलदायी माना जाता है. कहा जाता है की जया एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मृत्यु के बाद नीच योनि जैसे कि भूत, प्रेत, पिशाच आदि से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति को शुभ फल की भी प्राप्ति होती है|

Disclaimer:

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’ NavTimes न्यूज़ लेख में बताये गए खबर की जिम्मेदारी नहीं लेता है/

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