• Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
Saturday, September 5, 2026
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
No Result
View All Result
Nav Times News
No Result
View All Result
Home राष्ट्रिय

जसोदाबेन की आँखों में अब सपना है और हाथों में हुनर

by Neha
July 19, 2025
in राष्ट्रिय
कोटवालिया समुदाय

साउथ गुजरात के नेत्रंग के शांत जंगलों में बसा कोटवालिया समुदाय बरसों से समाज के हाशिए पर रहा है। भौगोलिक रूप से अलग-थलग और सामाजिक रूप से उपेक्षित रहा है। पारंपरिक रूप से बांस से चीजें बनाने वाले इस समुदाय की कला में सांस्कृतिक धरोहर जरूर थी, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसके बदले उन्हें बहुत कम ही मिला। अदाणी फाउंडेशन ने जब कोटवालिया समुदाय के साथ काम शुरू किया, तो उनका उद्देश्य सिर्फ मदद नहीं था बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और पहचान दिलाना था। यह दान नहीं था यह साझेदारी थी ऐसी साझेदारी जो परंपरा और आधुनिकता को एक साथ लेकर चले।
जसोदाबेन की कहानी: बांस से आत्मनिर्भरता तक
32 साल की जसोदाबेन कोटवालिया, दो बच्चों की मां और अब ‘आनंदी सखी मंडल’ की प्रमुख हैं। कभी जो महिला गांव से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पाती थी वह आज अपने हाथों के हुनर से न सिर्फ अपना, बल्कि पूरी बिरादरी का भविष्य बदल रही हैं। जसोदाबेन कहती हैं, “जब अदाणी फाउंडेशन हमारी बस्ती में आया, उन्होंने हमारे काम की कद्र की। पहली बार लगा कि हम भी कुछ कर सकते हैं”। इसके बाद उन्हें और अन्य महिलाओं को आधुनिक डिज़ाइन, फिनिशिंग और बाज़ार की मांग के अनुरूप बांस उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी गई।

विज्ञापन– क्या आप कलाकार बनाना चाहते है ? क्या आप फिल्म जगत में अप ना नाम  बनाना चाहते है?

रोज़गार से मिला आत्म-सम्मान
फाउंडेशन ने मशीनें दीं, जिससे काम आसान हुआ और शारीरिक थकावट भी कम हुई। इससे उत्पादन बढ़ा और अब उनके बनाए उत्पाद सीधे प्रदर्शनियों और सरकारी आउटलेट्स जैसे ‘रूरल मॉल’ में बिकते हैं। जसोदाबेन गर्व से कहती हैं, “पहले हम मेहनत करते थे और मुनाफा दलालों को मिलता था। अब हमें अपने हाथों की कीमत पता है”। आज वे एक ऐसी महिला समूह का नेतृत्व कर रही हैं, बाजार समझती हैं और दूसरी महिलाओं को प्रेरणा देती हैं।
शिक्षा से बदली पीढ़ी
फाउंडेशन ने ‘उत्थान प्रोजेक्ट’ की शुरु किया जिससे कोटवालिया बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। जसोदाबेन के बच्चे अब ‘केवाड़ी प्राथमिक शाला’ में पढ़ते हैं। वह स्कूल जिसे फाउंडेशन ने सहयोग दिया है। वह भावुक होकर कहती हैं, “मैं नौवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ पाई, लेकिन जब मेरे बच्चे यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल जाते हैं तो ऐसा लगता है जैसे सपना सच हो गया हो”।
सेहत: वह ताकत जो दिखती नहीं पर बहुत जरूरी है

ये भी पड़े-कानपुर सुपरस्टार्स ने यूपी टी20 लीग सीजन 3 के लिए घोषित किया ओपन ट्रायल्स

स्वास्थ्य सेवाओं के बिना कोई विकास अधूरा है। इसलिए फाउंडेशन ने नेत्र परीक्षण, मेडिकल कैम्प और हाइजीन किट वितरण जैसे कई प्रयास किए। खासकर बांस की बारीक कारीगरी में आंखों की रोशनी बहुत जरूरी होती है, ऐसे में आंखों की जांच उनके रोज़गार को बचाने वाली साबित हुई।
आत्मसम्मान की ओर पहला कदम
जसोदाबेन अकेली नहीं हैं। फाउंडेशन ने दर्जनों महिला स्वयं सहायता समूह बनाए हैं, जहां महिलाएं लोन ले रही हैं, कारोबार समझ रही हैं, बजट बना रही हैं और अब दूसरों की मदद कर रही हैं। जो महिलाएं कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं, आज वे आत्मनिर्भर हैं, आवाज़ उठाती हैं, फैसले लेती हैं और बदलाव की अगुआ बनी हैं।

परंपरा से भविष्य की ओर
अदाणी फाउंडेशन ने बांस की इस पारंपरिक कला को खत्म नहीं किया, बल्कि उसे नया रूप, नया बाजार और सम्मान दिया। विकास थोपा नहीं गया बल्कि समुदाय के साथ मिलकर गढ़ा गया। नेत्रंग के जंगलों में अब कोटवालिया समुदाय का अस्तित्व मिटता नहीं, बल्कि चमकता नजर आता है अपनी पहचान के साथ, अपनी कला के साथ। अब वे सिर्फ एक बांस कारीगर नहीं हैं। वे एक लीडर हैं, एक शिक्षक हैं और सबसे बढ़कर उम्मीद की एक जीवंत मिसाल हैं। जब एक महिला उठती है तो वह अकेली नहीं उठती वह अपने साथ पूरे समाज को उठाती है।

Tags: Adani FoundationBamboo ArtEducation For AllJasodaben StoryKotwalia CommunityRural Women LeadershipSustainable DevelopmentTribal EmpowermentWomen Empowerment
Advertisement Banner Advertisement Banner Advertisement Banner
Neha

Neha

Recommended

Today’s Horoscope 17th July 2023

Today’s Horoscope 17th July 2023 | आज का राशि फल दिनांक 17 जुलाई 2023

3 years ago
Death

Ghaziabad News : प्रेमिका से देर रात मिलने गए प्रेमी की पीट-पीटकर कर दी हत्या|

3 years ago
Facebook Twitter Instagram Pinterest Youtube Tumblr LinkedIn

Nav Times News

"भारत की पहचान"
+91 (783) 766-7000
Email: navtimesnewslive@gmail.com
Location : India

Follow us

Recent News

Discover thrilling bc game online casino matches

September 5, 2026
Ageas Federal Life Insurance

Ageas Federal Life Insurance Takes Super Protect Plus Plan to Policybazaar, Strengthening Digital Distribution

September 5, 2026

Click on poster to watch

Bhaiya ji Smile Movie
Bhaiya ji Smile Movie

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)

No Result
View All Result
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)