• About Us
  • Advertisements
  • Terms
  • Contact Us
Sunday, June 21, 2026
Nav Times News
Best Acting School in Chandigarh
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
No Result
View All Result
Nav Times News
No Result
View All Result
Home राष्ट्रिय

बेमतलब की जेल (Prison)

अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार)

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
November 27, 2024
in राष्ट्रिय
0
Prison

जेल (Prison) या कारागार एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे अपराधियों को सबक सिखाने के लिए बनाया गया था। इसके पीछे का प्रयोजन यह था कि इससे अपराधियों को समाज से दूर रखकर उन्हें उनके अपराध का दंड दिया जाए, जिससे उन्हें सुधारा जा सके और समाज में फिर से एक बेहतर नागरिक के रूप में पहुंचाया जा सके। जेल में कैदियों को रखने का यही मकसद होता है कि वे फिर वह अपराध न करें। लेकिन कई बार ऐसी ख़बरें सुनने-पढने को मिल जाती हैं, जिन्हें जानने के बाद लगता है कि इन जेलों का होना बेमतलब ही है… आपने भी कई बार इस तरह कि खबर सुनी होगी कि किसी गैंगस्टर ने जेल में कैद होने के बावजूद किसी बड़ी अपराधिक घटना को अंजाम दे दिया। तब यही सवाल मन में आता होगा कि जब वो अपराधी सालों से जेल में कैद है, तो फिर इतनी बड़ी घटना को अंजाम आखिर कैसे दे दिया होगा।

ये भी पड़े– सामाजिक न्याय की योद्धा अनुप्रिया (Anupriya)

और अगर यह इतना ही आसान है तो इतनी बड़ी-बड़ी जेलें होने का मतलब ही क्या हैं…? इस तरह की घटनाएँ जेल व्यवस्था की भेद्यता को दर्शाती है। जिससे साफ पता चलता है कि इस व्यवस्था को बनाए रखने के जिम्मेदार लोग ही इसे कमजोर कर रहे हैं। बिना इसके यह संभव नहीं कि एक कैदी जो सालों से जेल में बंद है, वो जेल के अंदर से ही किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सके। इस तरह की घटनाओं में यह भी सामने आया है कि इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए अपराधियों के पास मोबाईल फ़ोन, लेपटॉप और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ भी होती है, जिससे वे बाहर के साथियों से संपर्क करते हैं। जेल विभाग की सांठगांठ के बिना यह संभव नहीं है।

विज्ञापन– क्या आप कलाकार बनाना चाहते है ? क्या आप फिल्म जगत में अपना नाम बनाना चाहते है?

जेल (Prison) प्रशासन भले ही सख्ती की बात करे लेकिन इस सख्ती का भी इन अपराधियों पर कोई असर नहीं है। क्योंकि इससे बचने के उपाय देने वाले भी जेल में ही मौजूद हैं। उदाहरण के लिए सुरक्षा बनाए रखने के लिए समय-समय पर अपराधियों के सेल और बैरकों की तलाशी ली जाती है। तलाशी के समय ये अपराधी जेल में अपने सहयोगियों को अपने फ़ोन या अन्य प्रतिबंधित सामान सौंप देते हैं। या इनके सहयोगी इनके फ़ोन, लेपटॉप अपने पास रखते हैं और अपराधी इनका उपयोग कर अपने सहयोगियों को लौटा देते हैं। इस तरह ये कभी पकड़ में ही नहीं आते हैं।

‘विज्ञापन – जाने बेस्ट प्रोडक्शन हाउस इन इंडिया के बारे में | लाइन प्रोडूसर इन इंडिया की पूरी जानकारी |

इन डिवाइसों को पकड़ने के लिए कई जेलों में जैमर और कैमरे भी लगाए गये हैं, लेकिन जेल के किस हिस्से में जैमर और कैमरे की पहुँच नहीं है, इसकी जानकारी भी इनके सहयोगियों द्वारा मिल जाती है। इस तरह ये अपराधी बेखौफ अपराधों को अंजाम देते हैं। सरकार के नियम-कानून भी इन अपराधों को रोकने के लिए काफी नहीं हैं। जैसे कैदियों तक प्रतिबंधित सामान की पहुँच रोकने के लिए प्रिज़नर्स एक्ट में संशोधन कर जेल में बंदियों के पास मोबाइल मिलने पर पांच साल तक की सजा, इंटरनेट डिवाइस मिलने पर सजा के साथ 50 हजार रुपये जुर्माना और अन्य प्रतिबंधित सामान रखने पर तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान रखा गया है।

लेकिन जो अपराधी पहले से ही संगीन अपराधों के लिए लम्बी सज़ा काट रहे हैं और जिनके लिए जेल (Prison) में ही सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। उनके लिए दो-तीन साल की अतिरिक्त सज़ा काटना कोई बड़ी बात नहीं है। इस तरह नियम-कानून और टेक्नोलॉजी से भी इन अपराधियों को रोक पाना संभव नहीं दिखाई देता, तो फिर सवाल यह उठता है कि जब अपराधी जेल के अंदर से भी अपराधों को अंजाम दे ही रहे हैं तो जेलों के होने का मतलब ही क्या है…? जिस उद्देश्य के साथ जेल व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। जब वह सार्थक ही नहीं हो पा रही है, तो ये सब व्यर्थ ही है। जब व्यवस्था में शामिल लोग ही नियमों को ताक पर रख रहे हैं तो किस प्रकार जेलों को सुधारगृह बनाया जा सकता है। अगर सच में न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाना है और जेलों के उद्देश्य को

Tags: Governmentpolitical strategistPrisonWriter
Advertisement Banner Advertisement Banner Advertisement Banner
नवटाइम्स न्यूज़

नवटाइम्स न्यूज़

Digital Head @ Nav Times News

Recommended

Tribal Girl

Jharkhand में एक नाबालिक आदिवासी लड़की से 5 हैवानो ने किया गैंगरेप|

3 years ago
Birth Anniversary of Satish Kaushik

Birth Anniversary of Satish Kaushik : स्वर्गीय बॉलीवुड दिग्गज कलाकार सतीश कौशिक का आज हैं 67वां जन्मदिन, जाने सतीश के जीवनकाल से जुडी एहम बाते|  

3 years ago
Facebook Twitter Instagram Pinterest Youtube Tumblr LinkedIn

Nav Times News

"भारत की पहचान"
+91 (783) 766-7000
Email: navtimesnewslive@gmail.com
Location : India

Follow us

Recent News

HOPE Foundation

BD India and the HOPE Foundation Committed to Helping Upskill Young Adults

June 21, 2026
Hyderabad

Hyderabad- Come to Telangana with Ideas, We Assure Encouragement to Turn them into Reality: Sridhar Babu, IT Minister

June 21, 2026

Click on poster to watch

Bhaiya ji Smile Movie
Bhaiya ji Smile Movie

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)

No Result
View All Result
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)