• About Us
  • Advertisements
  • Terms
  • Contact Us
Thursday, July 30, 2026
Nav Times News
Best Acting School in Chandigarh
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
No Result
View All Result
Nav Times News
No Result
View All Result
Home राष्ट्रिय

कम होती पीएम मोदी की लोकप्रियता! : डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
August 4, 2025
in राष्ट्रिय
0
पीएम मोदी

हमने पिछले डेढ़ दशक के दौरान भारतीय राजनीति को कई परिदृश्यों में बदलते देखा है। कैसे कुछ बेहतर सोशल मीडिया कैंपेन्स के दम पर एक राज्य तक सीमित राजनेता राष्ट्रीय चेहरा बन गया और सत्ता के केंद्र में स्थापित हो गया। जाहिर है बात पीएम मोदी की हो रही है जिन्होंने लगातार तीन बार न केवल देश का प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया, बल्कि विश्व की सबसे बड़ी आबादी को अपनी वाक्पटुता से एक काल्पनिक ‘नए भारत’ का सपना दिखाने में भी नई मिसाल कायम की। हालांकि अब जब समय के साथ स्वप्न लोक में खोई जनता धीरे-धीरे जागना शुरू हो रही है तो पीएम मोदी का भी हकीकत से सामना करना मुश्किल होता जा रहा है। इसे उनकी सभाओं में लोगों के इंतज़ार में मुंह निहारती खाली कुर्सियों, ‘मन की बात’ से पुनः निर्जीव होने की कगार पर पहुंच रहे रेडियो स्टेशंस और टीवी चैनल्स पर उनके भाषणों के लिए चैनल्स के कर्मचारियों द्वारा ही बढ़ाई जा रही टीआरपी से भली-भाँती समझा जा सकता है। यहाँ तक कि वो सोशल मीडिया भी अब कोई तिलिस्म करने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहा है जो नरेंद्र मोदी के मुखारविंद से निकलने वाले किसी शब्द मात्र को ‘राम बाण’ बनाने की शक्ति रखता था।

ये भी पड़े-भारत के 100 शहरों में ‘स्टीलएज महोत्सव’ की शुरुआत — ज्वेलर्स को बीआईएस सर्टिफाइड फिजिकल सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के प्रति किया जा रहा जागरूक

इस बात से शायद कई लोग अपनी सहमति रखें कि कभी मंच पर पीएम मोदी आते तो कुर्सियों पर बैठने के लिए भी जगह कम पड़ जाती थी, और टीवी पर भाषण आने भर से रिमोट मानो खुद-ब-खुद ‘स्टे’ मोड में चला जाता था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि सभाओं में खाली कुर्सियाँ वीआईपी गेस्ट की तरह सामने की पंक्ति में विराजमान दिखती हैं, और मन की बात का नाम सुनते ही रेडियो-टीवी के वॉल्यूम, अपने आप मंद होने को मचल उठते हैं। जहाँ कभी चैनल वाले खोज-खोजकर उनके भाषण लगाने को आतुर रहा करते थे, बहुत से अभी भी हैं, वहीं अब जनता खुद ढूंढ-ढूंढकर चैनल बदलने में सुकून महसूस करती है। पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्राओं ने मुझे यह अनुभव करने पर मजबूर कर दिया है कि मोदीजी के भाषण अब पहले जैसे कानों में शहद नहीं, बल्कि नींद का सिरप घोलने का काम करने लगे हैं। तो क्या मोदी मैजिक कम होता जा रहा है? यदि हाँ तो वो कौन से कारण हैं जिन्हे पीएम मोदी के लोकप्रियता के ढ़लते ग्राफ का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

लोकप्रियता की इस गिरावट में कई कारक अपनी भूमिका निभा रहे हैं। पहला लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए ने 293 सीटें हासिल कीं। यह आंकड़ा सत्ता में बने रहने के लिए तो पर्याप्त था, लेकिन मोदी और उनके समर्थकों द्वारा गढ़े गए ‘अबकी बार 400 पार’ नारे से बहुत दूर था। इस नारे को लेकर पूरे देश में खूब प्रचार हुआ, मगर नतीजे जनता के भरोसे का अलग ही चित्र दिखा गए। यही कारण है कि यह नारा अब सत्ता के लिए उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। जिसका जिक्र मैंने लोकसभा चुनाव से पूर्व लिखे अपने लेखों में भी लगातार किया है।

दूसरा विदेश नीति के मोर्चे पर भी मोदी सरकार को लगातार आलोचना झेलनी पड़ रही है। फिर बात ट्रंप और अमेरिका के साथ खराब होते दोस्ताना संबंधों की हो या पाकिस्तान के साथ युद्धविराम की सहमति की, यहाँ तक कि स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अचानक दिया गया उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफ़ा भी इसी क्रम में गिना जा सकता है। कहना गलत नहीं होगा कि हाल की कुछ गतिविधियों ने मोदी सरकार की पारदर्शी व सख्त निर्णय लेने वाली छवि पर आंच डालने का काम किया है, साथ ही उनके समर्थकों को भी बराबर मात्रा में निराश किया है। फिर लम्बे समय से चले आ रहे ईडी, सीबीआई या चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को कंट्रोल करने के आरोप भी पीएम मोदी और उनकी सरकार से जनता के भरोसे को डगमगाने में सहायक भूमिका निभा रहे हैं।

विज्ञापन– क्या आप कलाकार बनाना चाहते है ? क्या आप फिल्म जगत में अप ना नाम  बनाना चाहते है?

मीडिया की भूमिका भी इस पूरे परिदृश्य में अहम है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 151वें नंबर पर रहने के अलावा, बीते कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ पत्रकारों ने ऑन कैमरा यह स्वीकार किया है कि उन पर सरकारी दबाव रहा है। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी बताती हैं कि आलोचनात्मक आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों को शासन-प्रशासन का डर भी दिखाया गया है। ‘गोदी मीडिया’ शब्द का चलन इसी वजह से हुआ और यह लोगों की जुबान पर चढ़ गया। ऐसे में जब मीडिया स्वतंत्र न दिखे और सत्ता के पक्ष में झुकी हुई लगे, तो यह भी जनता के भरोसे को कमजोर करता है और विश्व पटल पर लोकप्रिय प्रधानमंत्री की लोकप्रियता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

इन सबके बीच, संघ प्रमुख का पीएम मोदी पर असंतोष जताने की खबरें हो या भाजपा के भीतर ही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का जोर पकड़ने जैसी अटकलों का सुर्ख़ियों में तब्दील होना, यह सभी कृत्य नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के रूप में कमजोर होती पकड़ की ओर इशारा करते हैं। हालाँकि यह भी एक परम सत्य है कि मोदी अभी भी भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक हैं, और उनके ही पॉजिटिव औरा के दम पर बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता के शीर्ष पर बने रहने में कामयाब रही है, लेकिन इस बात से भी मुंह नहीं फेरा जा सकता कि यदि उठते सवालों को नवाचारिक दृष्टि से यानी पीएम मोदी में फिर वही पुराने चार्म की तलाश को छोड़कर कुछ नए आयामों को नहीं जोड़ा गया तो आने वाला समय पीएम मोदी के लिए काफी कठिन रहने वाला है।

Tags: Atul MalikramPM Modipopularity of Pm Modiपीएम मोदी
Advertisement Banner Advertisement Banner Advertisement Banner
नवटाइम्स न्यूज़

नवटाइम्स न्यूज़

Digital Head @ Nav Times News

Recommended

Dead Body

यूपी में अब शव को लेकर प्रदर्शन किया तो होगा कड़ा ऐक्‍शन, सरकार ने अंत्‍येष्टि के लिए जारी की गाइडलाइन

4 years ago
UAPA

UAPA के तहत जारी लिस्ट में 2022 से 2023 तक 23 आतंकवादियों में से 21 इस्लामवादी और 2 खालिस्तानी : ग्रह राज्य मंत्री द्वारा लोकसभा में दी गई सुचना|

3 years ago
Facebook Twitter Instagram Pinterest Youtube Tumblr LinkedIn

Nav Times News

"भारत की पहचान"
+91 (783) 766-7000
Email: navtimesnewslive@gmail.com
Location : India

Follow us

Recent News

Signify Introduces Philips FocusGlow Range: Lighting Engineered for Eye Comfort, Without Compromising on True Colour

Signify Introduces Philips FocusGlow Range: Lighting Engineered for Eye Comfort, Without Compromising on True Colour

July 29, 2026
Manipal University Jaipur Brings Global Experts Together for ACIFFS-2026

Manipal University Jaipur Brings Global Experts Together for ACIFFS-2026

July 29, 2026

Click on poster to watch

Bhaiya ji Smile Movie
Bhaiya ji Smile Movie

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)

No Result
View All Result
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)