• About Us
  • Advertisements
  • Terms
  • Contact Us
Thursday, April 23, 2026
Nav Times News
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs
No Result
View All Result
Nav Times News
No Result
View All Result
Home राष्ट्रिय

राजनेताओं और एनजीओ का दोहरा चरित्र, छीन रहा है हसदेव के बाहर स्थित सरगुजा क्षेत्र के आदिवासिओं (Tribals) से विकास का हक

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
February 12, 2024
in राष्ट्रिय
0
Tribals

छत्तीसगढ़ का खनिज संपदा से समृद्ध सरगुजा क्षेत्र जो हसदेव अरण्य के बाहर स्थित है, पिछले कुछ समय से राजनीति के कारण अनावश्यक ही विवादों का केंद्र रहा है। एक तरफ तो, राहुल गांधी जैसे नेता कहते हैं कि बड़े व्यावसायिक संस्थान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) समुदायों के लोगों को अपने संस्थानों में रोजगार नहीं करने देते और ये सब कह कर खुद को उनका हितैषी बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे हसदेव अरण्य क्षेत्र के बाहर सरगुजा में चल रही एकमात्र पी ई के बी खदान जिसमें इस क्षेत्र के आदिवासी (Tribals) समुदाय के 5000 से ज्यादा लोग कार्यरत हैं, का विरोध करके वहाँ के आदिवासियों से उनका रोजगार और विकास का हक छीनने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि यह एकमात्र खदान रोजगार और विकास के लिए इस क्षेत्र में अत्यंत आवश्यक हैं।

*राहुल गांधी का विरोध*

राहुल गांधी का कहना है कि बड़ी कंपनियां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) समुदायों को नौकरी नहीं दे रही हैं। वे इन समुदायों के विकास का समर्थन करते हैं, लेकिन हसदेव क्षेत्र से बाहर स्थित क्षेत्र में खनन का विरोध करते हैं। खनिज संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र, लगातार अनावश्यक ही राजनीतिक विवादों में उलझाया जा रहा है। एक ओर, राहुल गांधी जैसे नेता पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के नाम पर खनन का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, आंकड़ें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। क्या सचमुच पी ई के बी खदान आदिवासियों के विकास को छीन रही है, या फिर ये राजनीतिक दांव-पेंच का शिकार हो रहा है? आइए, इस पेचीदा मुद्दे की तह तक जाएं।

ये भी पड़े– नीतीश का राजनीतिक चरित्र समझना उन्हें पलटीमार बताने जितना आसान नहीं – अतुल मलिकराम (Atul Malikram) राजनीतिक रणनीतिकार

*हसदेव बचाओ आंदोलन*

हसदेव बचाओ आंदोलन, जो खनन का विरोध कर रहा है, का नेतृत्व आलोक शुक्ला कर रहे हैं। शुक्ला ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, और कुछ लोगों ने उन पर ब्राह्मणवाद का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सवर्ण लोग हसदेव के नाम पर आदिवासियों से उनका आगे बढ़ने का हक, रोजगार और शिक्षा का हक छीन रहे हैं। (Tribals)

*खनिज संपदा के दोहन का विरोध या राजनीतिक लाभ?*

एनजीओ का कहना है कि खनन से आदिवासियों का विस्थापन होगा और उनकी आजीविका छिन्न-भिन्न हो जाएगी। लेकिन हकीकत इससे अलग है। यहाँ विस्थापन अब इतिहास बन गया है लोगों को इस आदिवासी बहुल इलाके में ही रोजगार मिल रहा है। अगर पर्यावरण संरक्षण की बात की जाए तो पिछले 10 वर्षों में हसदेव खदान में 11.50 पेड़, 90% सफलता दर के साथ पेड़ लगाए गए हैं और पिछले एक साल में ही 2.10 लाख पेड़ों को लगे गया है, इतना ही नहीं, राजस्थान के RVUNL ने छत्तीसगढ़ के वन विभाग के साथ मिलकर 40 लाख पेड़ लगाए हैं, जिसका खर्च पूरी तरह से RVUNL ने वहन किया है। विकास के साथ जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने के सफल प्रयास भी लगातार जारी हैं और इसमें महत्वपूर्ण सफलता भी मिल रही है। ऐसे में जब पर्यावरणीय उपायों का इतना व्यापक अनुसरण हो रहा है, तो इस विरोध का क्या औचित्य है?

विज्ञापन– क्या आप कलाकार बनाना चाहते है ? क्या आप फिल्म जगत में अपना नाम बनाना चाहते है?

*आदिवासीयों के विकास का सच*

खनन का विरोध करने वाले अक्सर दावा करते हैं कि इससे आदिवासियों के विकास के अवसर छीन लिए जाएंगे। लेकिन आंकड़ें फिर से अलग कहानी कहती हैं। हसदेव खदान क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी आई है। खदान के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत आदिवासी कल्याणकारी योजनाओं द्वारा व्यापक कार्य हो रहे हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा, खदान में ही स्थानीय आदिवासियों (Tribals) को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य को खदान से लगभग 7000 करोड़ राजस्व की प्राप्ति हुई है जो सीधे तौर पर जन कल्याण के कार्यों उपयोग होता है।

*राजनीतिक दोगलापन का शिकार?*

तो फिर सवाल उठता है कि जब पर्यावरणीय उपायों का पालन किया जा रहा है और आदिवासी विकास को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, तो इतना विरोध क्यों? कई लोगों का मानना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक दांव-पेंच से ज्यादा कुछ नहीं है। विपक्षी दल अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए पर्यावरण और आदिवासी विकास जैसे संवेदनशील मुद्दों का सहारा ले रहे हैं। विकास, खनन संपदा दोहन से लाभ और पर्यावरण संबंधित आंकड़ों को जन जन तक पहुचाएं

‘विज्ञापन – जाने बेस्ट प्रोडक्शन हाउस इन इंडिया के बारे में | लाइन प्रोडूसर इन इंडिया की पूरी जानकारी |

हसदेव के पास स्थित क्षेत्र में खनन का मुद्दा विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है, लेकिन यह भी सच है कि पर्यावरणीय उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, खदान से आदिवासी (Tribals) समुदायों को भी सम्पूर्ण लाभ मिल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक स्वार्थों को दूर रखकर, सच और झूठ को पहचान कर विकास और पर्यावरण के उपायों के जो प्रयास किए जा रहे हैं उनको जन जन तक पहुँचा कर सही तथ्यों को उजागर करके ही आदिवासियों को मिल रहे अधिकारों का सम्मान किया जा सकता है।

Tags: HasdevNGOsPoliticiansRahul GandhiSurgujaTribals
Advertisement Banner Advertisement Banner Advertisement Banner
नवटाइम्स न्यूज़

नवटाइम्स न्यूज़

Digital Head @ Nav Times News

Recommended

Red Cross

विश्व रेडक्रॉस (Red Cross) दिवस के उपलक्ष्य में रक्तदान शिविर का आयोजन

2 years ago
Girls Day

सेक्टर 1 कॉलेज में मनाया गया Girls Day

3 years ago
Facebook Twitter Instagram Pinterest Youtube Tumblr LinkedIn

Nav Times News

"भारत की पहचान"
+91 (783) 766-7000
Email: navtimesnewslive@gmail.com
Location : India

Follow us

Recent News

Quint Digital Launches Time Out India and Announces First Time Out Market in New Delhi

Quint Digital Launches Time Out India and Announces First Time Out Market in New Delhi

April 23, 2026
Near-Completion Projects See Faster Sales as Execution Risk Becomes a Key Concern

Near-Completion Projects See Faster Sales as Execution Risk Becomes a Key Concern

April 23, 2026

Click on poster to watch

Bhaiya ji Smile Movie
Bhaiya ji Smile Movie

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)

No Result
View All Result
  • Home
  • चंडीगढ़
  • राज्य
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • दिल्ली
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • महाराष्ट्र
    • जम्मू & कश्मीर
    • हिमाचल प्रदेश
  • राष्ट्रिय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • मनोरंजन
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • व्यापार
  • ऑटोमोबाइल्स
  • टेक्नोलॉजी
  • ज्योतिष
  • वीडियो Video
  • चमकते सितारे
  • Blogs

© 2021-2026 All Right Reserved by NavTimes न्यूज़ . Developed by Msasian Entertainment (MS GROUPE)