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Home राष्ट्रिय

Politicians से भी लिया जाए काम का लेखा-जोखा

अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार)

नवटाइम्स न्यूज़ by नवटाइम्स न्यूज़
September 5, 2024
in राष्ट्रिय
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Politicians

Politicians – भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र को समझाते हुए अब्राहम लिंकन ने कहा था, “जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन”, जहाँ जनता अपने बीच से ही एक व्यक्ति को नेता चुनती है और वही नेता जनता के हित में काम करते हैं। यह नेता जनता के प्रतिनिधि होते हैं और जनता का विश्वास उनके कंधों पर होता है। जब कोई नेता किसी पद पर आसीन होता है, तो उसके कार्य और निर्णय का असर सीधे तौर पर जनता के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि जनता को यह जानकारी हो कि उसके नेता ने क्या काम किया है, किस प्रकार के फैसले लिए हैं, और इन फैसलों का क्या प्रभाव पड़ा है।

जिस तरह किसी प्राइवेट ऑफिस में कर्मचारियों से उनके काम का हिसाब माँगा जाता है कि किसने कितना काम किया, कितनी प्रोडक्टिविटी दिखाई, और कौन कितनी छुट्टियां लेकर आराम करता रहा। और उसी के आधार पर उनकी तनख्वाह में बढ़ोतरी, नौकरी की निरंतरता, पदोन्नति और अन्य पहलुओं पर निर्णय लिया जाता है। उसी तरह हमारे देश के नेताओं से भी हर महीने, तिमाही, या छमाही रूप से उनके किये कामों का हिसाब भी माँगा जाए। संभवतः नेतागण अक्सर अपने पार्टी के सीनियर लीडर्स को लेकर जवाबदेह होते हैं लेकिन उनकी असल जवाबदेही जनता के प्रति है। दूसरा, काम का हिसाब मांगने पर नेताओं में न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि वे अधिक गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।

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साथ ही वे यह भी अच्छी तरह समझ सकेंगे कि उनका पद सिर्फ दो चार भाषण या सभाएं करने के लिए नहीं है, बल्कि उनकी जिम्मेदारी है कि वे देश और जनता की भलाई के लिए ईमानदारी से काम करें। आखिरकार, ये नेता वही लोग हैं जो जनता के दिए टैक्स से अपने पद का लाभ उठा रहे हैं। इसलिए यह हर नागरिक का अधिकार है कि उसे जानकारी हो कि उसकी मेहनत कि कमाई का उपयोग कहाँ और कैसे हो रहा है। यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगी, बल्कि यह नेता और जनता के बीच सीधा संबंध भी बनाएगी। साथ ही इससे जनता को पता रहेगा कि उनके द्वारा चुने गये नेता ने अपने वादों को कितना और किस तरह निभाया है या वो वादे केवल बातें ही थे। रिपोर्ट के आधार पर नागरिक यह भी तय कर सकेंगे कि किसी नेता को अगली बार मौका देना है या नहीं। (Politicians)

यह रिपोर्ट अलग-अलग स्तर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पेश की जा सकती है। जैसे छोटे स्तर पर नेता नियमित रूप से जन सभाएं आयोजित कर सकते हैं, जहाँ वे जनता के सामने अपने काम का ब्यौरा दे सकते हैं। जनता को सीधे जानकारी देने के लिए न्यूज़लेटर्स या पत्र भेजे जा सकते हैं, जिसमें नेताओं के कार्यों का विस्तृत विवरण हो। हर साल एक वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जा सकती है, जिसमें नेता के पूरे साल के काम का सारांश हो। यह रिपोर्ट सार्वजनिक पुस्तकालयों, सरकारी दफ्तरों, और स्थानीय समाचार पत्रों में उपलब्ध कराई जा सकती है। अभी सिर्फ चुनावों के समय ही, या सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के तहत ही झूठ सच का डाटा जनता के सामने परोसा जाता है। जिसमें से आधे से अधिक कामों का कोई क्रॉस-चेक भी नहीं होता। नेताजी ने जो बोला, भोली जनता वही मान लेती है। किसे में जनता को भी ये भोलापन छोड़ना होगा।

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दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर के नेता अपने काम का ब्यौरा ऑनलाइन दे सकते हैं। इसके लिए सरकार की वेबसाइट पर एक विशेष सेक्शन दिया जा सकता है, जहाँ नेता अपने कार्यों की रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं। इसमें उनके द्वारा किए गए विकास कार्य, खर्च की गई राशि, और भविष्य की योजनाएं शामिल की जा सकती हैं। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। नेता अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नियमित रूप से अपनी गतिविधियों और काम का विवरण साझा कर सकते हैं। या एक विशेष मोबाइल ऐप बनाया जा सकता है, जिसमें नेता अपने काम की जानकारी डाल सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से जनता भी सीधे सवाल पूछ सकती है और फीडबैक दे सकती है। (Politicians)

इस पूरी प्रक्रिया में जनता की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। एक सशक्त लोकतंत्र का मतलब सिर्फ चुनाव में वोट डालना नहीं है। यह एक सतत प्रक्रिया है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। हर नेता से सवाल करना चाहिए, और हर काम पर नजर रखनी चाहिए। हमारे सक्रिय रहने से ही नेताओं पर दबाव बना रहेगा, और मैं स्वाभाविक रूप से यह भी मानता हूँ कि काम या अधिक और अच्छे काम अक्सर दवाब में ही होते हैं। यदि रिपोर्टिंग का सिस्टम शुरू होता है तो इससे हर नेता यह कोशिश करेगा कि उसका काम सबसे बेहतर हो, ताकि जनता का विश्वास और समर्थन बना रहे। नेताओं से काम का हिसाब मांगने का विचार केवल एक सुझाव नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक कदम भी है, जिसे हर हाल में उठाया ही जाना चाहिए। यह कदम लोकतंत्र की नींव को तो मजबूती प्रदान करेगा ही साथ-साथ देश के विकास की गति भी तेज करने में सहायक होगा। हमारी सक्रियता ही हमारे लोकतंत्र को सशक्त बनाएगी और राष्ट्र को प्रगति की ओर अग्रसर करेगी।

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Tags: AccountsDemocracygovernment officesMediaPoliticians
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